फिरोजाबाद। महानिदेशक, परिवार कल्याण, उत्तर प्रदेश शासन, यूनिसेफ एवं स्टिलबर्थ सोसाइटी ऑफ इंडिया की संयुक्त पहल पर स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज फिरोजाबाद के स्त्री एवं प्रसूति विभाग में स्टिलबर्थ (मृत्यु-जन्म) जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर गुरुवार को अध्ययन हेतु एक औपचारिक दौरा संपन्न हुआ।
विदित हो कि भारत में स्टिलबर्थ से तात्पर्य 28 सप्ताह की गर्भावधि पूर्ण होने के पश्चात होने वाले मृत जन्म से है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5, वर्ष 2021) के अनुसार, देश में स्टिलबर्थ की दर लगभग 12 प्रति 1000 कुल जन्म है।कार्यक्रम के दौरान स्टिलबर्थ के प्रमुख कारणों, बचाव के उपायों एवं रोकथाम संबंधी रणनीतियों पर गहन एवं उपयोगी चर्चा की गई। साथ ही, 100 शैय्या चिकित्सालय, फिरोजाबाद में पूर्व में हुई स्टिलबर्थ प्रभावित प्रसूताओं से किए गए प्रत्यक्ष साक्षात्कारों के अनुभव एवं निष्कर्ष भी साझा किए गए।
इस शैक्षणिक एवं जनस्वास्थ्य-उन्मुख पहल में डॉ. प्रेरणा जैन (प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, स्त्री एवं प्रसूति विभाग), डॉ. दिव्या चौधरी (एसोसिएट प्रोफेसर) तथा डॉ. नवीन जैन (मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज) की गरिमामयी उपस्थिति एवं सक्रिय सहयोग सराहनीय एवं उल्लेखनीय रहा।इस अवसर पर डॉ. तमकीन रब्बानी (प्रोफेसर, स्त्री एवं प्रसूति विभाग, ए.एम.यू. अलीगढ़ एवं संस्थापक सचिव, स्टिलबर्थ सोसाइटी ऑफ इंडिया) तथा डॉ. नसरीन नूर (प्रोफेसर, स्त्री एवं प्रसूति विभाग) की एक टीम ने सहभागिता की।
