समय भास्कर, फिरोजाबाद। ई-रिक्शा ने एक तरफ शिक्षित और बेरोज़गार युवाओं को रोजगार तो दिया, दूसरी ओर शहर में ट्रैफिक जाम को भी बढ़ावा दिया हैं वही पारंपरिक रिक्शा चालकों की रोजी-रोटी भी छीन ली। जहां देखो वहां ई रिक्शा ही दिखाई देंगे। यह स्थिति फिरोजाबाद शहर के गली मोहल्ले-चौराहों की ही नहीं है बल्कि पूरे भारतवर्ष के छोटे बड़े शहरों की हैं।
रोज़गार का सहारा, पर यातायात के लिए सिरदर्द
फिरोजाबाद शहर में ई-रिक्शा ने एक तरफ रोज़गार के अवसर पैदा किए हैं, वहीं दूसरी तरफ इसने शहर की यातायात व्यवस्था में भी बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। इन ई-रिक्शाओं की बढ़ती संख्या के कारण शहर के कई प्रमुख चौराहे और सड़कें लगातार जाम से जूझ रही हैं।फिरोजाबाद में शिक्षित और बेरोज़गार युवाओं के लिए ई-रिक्शा एक अहम रोज़गार का साधन बना है। इसने न सिर्फ़ उन्हें आजीविका दी है। हालांकि, इसी के साथ, शहर में पहले से चल रहे पारंपरिक रिक्शा चालकों की रोज़ी-रोटी पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ा है।यह समस्या सिर्फ़ फ़िरोज़ाबाद तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई छोटे-बड़े शहरों में यही स्थिति देखने को मिल रही है।
प्रमुख चौराहों पर जाम की समस्या
शहर के मुख्य इलाक़ों जैसे जैन मंदिर चौराहा, गांधी पार्क चौराहा,रसूलपुर चौराहा, स्टेशन रोड, कोटला चुंगी चौराहा, और सुहाग नगर डाकखाना चौराहा पर ई-रिक्शा और अन्य वाहनों की भारी संख्या के कारण यातायात अक्सर बाधित होता है। इन जगहों पर अक्सर लंबे जाम लग जाते हैं, जिससे लोगों को काफ़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।इसके अलावा, कुछ ऐसे इलाक़े जहाँ वाहनों के प्रवेश पर पाबंदी है, वहाँ भी ई-रिक्शा के घुसने से स्थिति और भी ख़राब हो जाती है।
यातायात नियमों की अनदेखी
ट्रैफिक जाम की इस समस्या के पीछे सिर्फ़ ई-रिक्शा ही नहीं, बल्कि टेंपो, ठेला, कार और मोटरसाइकिल चालकों द्वारा यातायात नियमों का पालन न करना भी एक बड़ा कारण है। शहर में वाहनों की संख्या, ख़ासकर ई-रिक्शा और मोटरसाइकिलों की संख्या, लगातार बढ़ रही है, जिससे सड़क पर दबाव बढ़ रहा है।फ़िरोज़ाबाद के नागरिकों और प्रशासन दोनों के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि कैसे रोज़गार के अवसर को बनाए रखते हुए शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाया जाए।
