सिनेमा 70 mm / Act Abhi – लाइट कैमरा और एक्शन , पंचायत का चौथा सीजन आ चुका है और शायद पंचायत को पसंद करने वालों ने देख भी लिया होगा।  इस बार पंचायत 4 में है  पंचायत का चुनाव, सचिव और रिंक्की का प्यार ,विधायक का कमीनापन और भी बहुत कुछ इस बार के सीजन में देखने को मिलेगा।  एक मिनट रुकिए , चलिए पता लगाते हैं कि इसमें क्या है ख़ास ,कितना आम या बेकार साबित हुआ है इस बार का सीज़न । लेकिन एक बात तो तय है की इस बात आपको कुछ डायलॉग ,कुछ सीन पंचायत को पसंद करने वालों को पसंद आएंगे।   पंचायत 4  के लास्ट के एपिसोड की भी बात आगे करेंगे।  साथ ही दर्शक इस बार के सीज़न के बारे में क्या बोल रहें है।
पिछले सीजन में विधायक और प्रधान की पार्टी में लड़ाई हो जाती है और सभी लोग थाने में पहुंच जाते है।  इसी के साथ होने लगता है पंचायत के चौथे सीज़न का इंतज़ार।  वैसे आपको तो पता ही होगा की पंचायत का तीसरा सीज़न लगभग फ्लॉप गया था।  इस बार लोग कुछ अच्छे की उम्मीद कर रहे थे।

कहानी – शो की कहानी शुरू होती है जिसमे पंचायत सचिव अपने ऊपर केस को लेकर चिंता में हैं।  क्योकि mba का उसका पेपर अच्छा हुआ है।  लेकिन 323 का जो केस लड़ाई के कारण भूषण ने सचिव के ऊपर किया है ।  अब सचिव को लग रहा है कि इससे उसका mba करने का सपना टूट जायेगा  और उसका करियर बर्बाद हो जायेगा।  इस बात से घबरा कर सचिव  भूषण से माफ़ी मांगने का फैसला करता है और प्रह्लाद के घर जारकर शराब पीकर माफ़ी मांगे के फैसला करता है।  इसके चलते वो आधी रात को भूषण के घर दीवाल कूदकर अंदर चला जाता है। इस पर भूषण और उसकी पत्नी को लगता है की उनके घर में चोर आ गया है।  भूषण को सचिव अभिषेक त्रिपाठी बोलता है जो हुआ उसके लिए सॉरी।  लेकिन भूषण बहुत चालक है वो कहता है की वो केस वापस ले लेगा लेकिन प्रधान जी को गोली लगने वाला  307 का  केस वापस लेना पड़ेगा।

इस बात पर प्रधान जी तैयार हो जाते है वो कहते है कि सचिव जी के करियर का सवाल है। हम केस वापस ले लेते है।  इस बात से खुश हो कर भूषण विधायक के घर जाकर उसको यह बात बताता है। इस बात से विधायक नाराज हो जाता है। प्रधान जी पर जो गोली चली है उस केस में भूषण और विधायक का भी नाम है पर बात सिर्फ भूषण के नाम को हटाने की होती है।  अगले दिन थाने में सचिव के साथ प्रधान मैडम , प्रल्हाद और सहायक विकास और भूषण के साथ विनोद आ जाते है लेकिन मामला अटक जाता है।  भूषण अपने नाम के साथ विधायक के नाम को हटाने की बात करता है। इस पर बात बन ही रही होती है लेकिन विधायक के घोड़े सितारा को भी वापस करना पड़ेगा। इस बात पर सचिव को गुस्सा आ जाता है और वो लोग थाने से वापस आ जाते है।  अब फुलैरा में प्रधानी के चुनाव आ जाते है भूषण विधायक के साथ मिलकर प्रधान जी के सामने नई नई मुश्किलें पैदा करता है।  उसकी जासूसी करवाता है।

प्रचार के लिए जो प्लान प्रधान जी की पार्टी बनती है उस प्लान को वो कॉपी कर लेता है।  सहायक विकास प्रहलाद को जो पैसे मिले थे सरकार से उससे एक जमीन खरीद लेता है।  इस बात का फायदा उठा कर भूषण विधायक को मामला बताता है और विधायक प्रधान जी और विकास के यहाँ रेड पड़वा देता है।  लेकिन आखिर समय पर कुछ ऐसा होता है की रेड डालने वाली टीम वापस लौट जाती है और भूषण का प्लान फेल हो जाता है।  चुनाव से दो दिन पहले गाँव को बिजली सप्लाई करने वाला ट्रांसफर्मर फुक जाता है। इस बात पर भूषण गाँव में ये बात फैलता है की प्रधान जी बिजली ठीक नहीं करवा पाएंगे।  उसको चुनाब में जिताइये वो ही गाँव का भला कर सकता है।  भूषण मौके का फायदा उठाते हुए गाँव में जनरेटर लेकर बिजली की व्यवथा करता है। प्रधान जो को भूषण बोलता है की वो ट्रांसफॉर्मर ठीक करवा सकता है।प्रधान जी की टीम के सामने एक समस्या यह है कि बिजली को ठीक करने वाला आदमी विधायक के गाँव का है और भूषण को पता है की प्रधान की टीम विधायक के गाँव में नहीं जा सकती है।  लेकिन चुनाव के कारण उनको विधायक के गाँव जाना पड़ता है।

वहां पर विधायक के आदमी सचिव पर हमाल कर के उसकी पिटाई कर देते है।   भूषण इस बात का फायदा उठा कर विधायक से कह कर गाँव की बिजली ठीक करवा देता है।  इस बीच सचिव का रिजल्ट आ जाता है और वो अच्छे नंबर से पास हो जाता है।  इस सब से बेखबर सचिव और रिंक्की का प्यार परवान चढ़ने लगता है।  रिंकी सचिव से पूछती है की अगर उसकी पार्टी चुनाव हार गई तो वो क्या करेगा तो वो बोलता है की इसमें क्या है वो रिजाइन कर देगा।  इस बात से रिंकी परेशान हो जाती है।  इसके बाद रिंकी और विधायक की बेटी का बाजार में झगड़ा हो जाता है वो भी कचौड़ी को लेकर। मामले को सुलझाने के लिए विधायक की तरफ से उसका आदमी और सचिव पहुंच जाता है और सचिब विधायक के आदमी की पिटाई लगा देता है।  और बोलता है कि अब हुआ हिसाब बराबर।  प्रधान जी चुनाव हार जाते है।  भूषण की पत्नी फुलैरा की प्रधान बन जाती है। यहाँ पर सीज़न समाप्त हो जाता है।

जिस तरह पंचायत के पहले सीज़न ने तहलका मचा दिया था उसके बाद इसके स्तर में सीज़न दर सीज़न गिरावट आती गई और पंचायत सीज़न 3 अपने निम्न स्तर पर जा पहुंचा।  दर्शकों ने इसको पूरी तरह से नकार दिया अगर सीज़न 3 के क्लाइमेक्स की देसी लड़ाई को छोड़ दें तो पूरा सीज़न खाना पूर्ति भर था।  बस बनाने को बना दिया। ऐसा कह सकते हैं।  इस बार की बात करे तो पिछली बार से इस बार का सीज़न काफी अच्छा है।  इस बार के सीज़न में चुनाव है सचिव और रिंकी का प्यार है।  विधायक का कमीना पन हैं।  लेकिन जैसे ही दर्शक जुड़ते ही है सीज़न 4 समाप्त हो जाती है।  इस बार स्कूल की सफाई को लेकर जो मारा मारी होती है वह काफी अच्छी है।  सीज़न 4 की शुरुआत जब सभी लोगो को पुलिस पकड़ कर थाने ले कर आती है वहां से शुरू होनी चाहिए थी जिससे एक कनेक्ट होता।  इस बार की पंचायत अधूरी सी लगी, चुनाब हारने के बाद पंचायत को समाप्त करना अखरता है।

हाई लाइट –  सभी ने अच्छा काम किया है एक बात तो यह है की लगभग सारे कलाकार थिएटर बैकग्राउंड के हैं खालिस एक्टिंग के अलावा कुछ नहीं विशुद्ध अभिनय। पहलाद का इमोशनल सीन काफी कुछ कह जाता है भाबुक कर देता है।  विधायक का किरदार करने वाले पंकज झा  ने दर्शको पर  अपना सिक्का जमा दिया है।  इस बार सभी ने एक नंबर काम किया है। कुछ डायलॉगस की खूब चर्चा हो रही है

– ऊपर का मैदा उनकी तरफ से है, अंदर का आलू हमारा है
-सचिव जी का कैट निकल गया
ससुर सब सुनै दे रहा है

क्या कह रहें है दर्शक – दर्शको को इस बार का सीज़न पसंद आ रहा है सभी लोग इसके बारे में बात कर रहें है।  लेकिंग शो की एंडिंग को लेकर  दर्शक बात भी कर रहें है।  वैसे तो शो अच्छा है लेकिन अगर एंडिंग ठीक होती जिस तरह से छोड़ है दर्शक भूखे ही उठ गए।  मेरा मतलब है कि अगर किसी दावत में जाओ और आपको भर पेट नहीं मिलता तो आप भूखे रह जाते हो। जब तक पांचवा सीज़न नहीं आता है।

 

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