Samay Bhaskar – Act Abhi Review –  4* /5* – 
फिल्म ‘मिराई’ एक ऐसी फिल्म है जो बॉलीवुड फिल्मों की उस कमी को उजागर करती है, जिससे वे अपना पीछा छुड़ाते हैं यानी अपनी करनी काटते हैं। वहीं, साउथ के फिल्ममेकर इसे अपना अभियान समझते हैं। वे ऐसी कहानियों पर फिल्म बनाते हैं जिसे देखते ही आपको अपने भारत पर, अपनी संस्कृति पर और उन फिल्ममेकर पर गर्व करना पड़ेगा। अगर आज मैं यह कहूं कि साउथ के फिल्म वालों को साउथ का फिल्म वाला कहना गलत है, तो यह बिल्कुल सही होगा, क्योंकि यही लोग असली भारतीय फिल्म की पहचान हैं और भारतीय सिनेमा को एक अलग मुकाम पर पहुंचा रहे हैं। कहानी, एक्शन, एक्टिंग और यहां तक कि टेक्निकल टर्म्स की बात करें, जिसमें साउंड, वीएफएक्स और बीजीएम शामिल हैं, ये लोग आज इस लेवल पर काम कर रहे हैं कि लोगों को पता ही नहीं चला कि ये कब इस स्तर पर पहुंच गए। जिन्हें हम सिर्फ एक राज्य की इंडस्ट्री कहते थे, क्योंकि लोग अक्सर “साउथ” कह देते हैं, लेकिन यह तमिल सिनेमा है, तेलुगू सिनेमा है, मलयालम सिनेमा है। जिस तरह का काम ये लोग कर रहे हैं, उसके क्या ही कहने।

कहानी और निर्देशन
चलिए फिल्म की बात करते हैं। ‘मिराई’ नाम थोड़ा अलग सा है जो आपको फैमिलियर नहीं लगेगा, लेकिन जब आप फिल्म देखेंगे तो आप इससे जुड़ते चले जाएंगे, इसका हिस्सा बनते चले जाएंगे। फिल्म का बीजीएम इतना शानदार है कि आपको फिल्म से डिस्कनेक्ट नहीं होने देता। फिल्म थोड़ी लंबी है लेकिन आपको बोर नहीं करेगी। कहानी की बात करते हैं। जिस तरह की कहानी निर्माता ने चुनी है, उसकी तारीफ करनी पड़ेगी क्योंकि आज के दौर को अध्यात्म के साथ मिलाकर जो सिनेमा का जादू इन्होंने पर्दे पर करने की कोशिश की है, उस जादू में ये सफल रहे हैं। हनुमान फिल्म से अपनी पहचान बनाने वाले एक्टर ने इस फिल्म में अपनी एक और अलग पहचान बनाई है और इस फिल्म के बाद उनकी स्टारडम एक अलग लेवल पर पहुंचने वाली है।

फिल्म शुरू होती है सम्राट अशोक के 9 ग्रंथों से। इन ग्रंथों को मानव भलाई के लिए दुनिया के हर कोने में फैलाया जाता है और एक-एक विशेष व्यक्ति को इसकी जिम्मेदारी दी जाती है। नौवां ग्रंथ वह है, अगर जिसने इस ग्रंथ को पा लिया, वह अमर बन जाएगा। इसके लिए खलनायक, जिसकी भूमिका देवदत्त गजेंद्र ने निभाई है, नौवें ग्रंथ को पाने के लिए अपने मिशन पर निकलता है और उसे रोकने के लिए फिल्म का हीरो निकलता है। उसे रास्ते में मिलती है ‘मिराई’ जो उसका साथ देती है। कहानी को इस तरह से आधुनिक यानी आज के दौर के साथ जोड़ा गया है कि आपको लगेगा ही नहीं कि आप कुछ अलग देख रहे हैं या कुछ अटपटा देख रहे हैं। यह निर्देशन की एक खासियत है।

एक्टिंग, स्क्रीनप्ले और संगीत
अब फिल्म की एक्टिंग की बात करेंगे तो सभी ने बहुत अच्छा काम किया है। रियलिस्टिक एक्टिंग की गई है। कोई भी ओवरएक्टिंग या कुछ अलग करने की कोशिश नहीं की गई। सभी लोगों ने शानदार काम किया है। श्रिया सरन के प्रभावशाली सीन के साथ फिल्म की शुरुआत होती है। फिल्म के मुख्य खलनायक की बात किए बिना यह बात अधूरी रहेगी। उन्होंने बहुत शानदार काम किया है और उसमें वह जंचे हैं।

अब बात करते हैं फाइटिंग की, तो बहुत ही शानदार फाइट सीन आपको फिल्म में देखने को मिलेंगे। फिल्म के संगीत की बात करें तो फिल्म में कोई गाना नहीं है, बल्कि एक बैकग्राउंड सॉन्ग है। अक्सर हम लोग फिल्मों में जहां गाने की जरूरत नहीं होती है, वहां भी गाना डाल देते हैं। फिल्म का बीजीएम अगर मैं एक नंबर कहूं तो गलत नहीं होगा। वह आपको उस ओर, उस अध्यात्म के समुद्र में बार-बार ले जाता है।

तो कुल मिलाकर कहा जाए तो यह एक शानदार फिल्म है और इस फिल्म को जरूर देखना चाहिए। अगर आप कुछ अलग, थोड़ी लंबी लेकिन पूरा मनोरंजन करने वाली पैसा वसूल फिल्म देखना चाहते हैं, तो अपने परिवार के साथ इस फिल्म को जाकर जरूर देख सकते हैं। ऐसी फिल्में कम आती हैं जो आपको आपकी जड़ों से जोड़कर आपको यह बता सकें कि सिनेमा बनाने के लिए अपनी जड़ों में रहना बहुत जरूरी है।

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