नई दिल्ली। कतर, जिसका क्षेत्रफल भारत के राज्य त्रिपुरा के बराबर है, दुनिया के सबसे अमीर और सबसे शक्तिशाली देशों में से एक है। महज़ 28 लाख की आबादी वाला यह देश, अपनी प्रति व्यक्ति आय और 200 अरब डॉलर की कुल जीडीपी के साथ आर्थिक महाशक्ति बन गया है।

प्राकृतिक गैस का भंडार: कतर की असली ताकत
कतर के शक्तिशाली होने का सबसे बड़ा कारण है इसके पास मौजूद प्राकृतिक गैस का विशाल भंडार। कतर दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार रखता है, जिसके पास 891 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस है। यह दुनिया के कुल नेचुरल गैस रिजर्व का लगभग 13% हिस्सा है।

कतर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) निर्यातक है। यह अपने कुल गैस उत्पादन का 75% से ज़्यादा निर्यात करता है, जिससे हर साल अरबों डॉलर की कमाई होती है। यह गैस दुनिया के 40 से अधिक देशों को भेजी जाती है। कतर के पास मौजूद नॉर्थ फील्ड गैस प्रोजेक्ट, जो 6,000 वर्ग किमी में फैला है, इसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। मौजूदा खपत दर के हिसाब से देखा जाए तो कतर के पास 609 सालों तक गैस की सप्लाई बनी रहेगी।

तेल और गैस से बनी आर्थिक बुनियाद
गैस के अलावा, कतर के पास 25.2 बिलियन बैरल का तेल भंडार भी है, जो इसकी आर्थिक स्थिरता में अहम भूमिका निभाता है। तेल और गैस दोनों मिलकर कतर की सरकारी आय का लगभग 85% हिस्सा हैं।

1970 के दशक में, जब पूरी दुनिया तेल संकट से जूझ रही थी और कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही थीं, तो कतर ने इसका फायदा उठाया। उस दशक में कतर की प्रति व्यक्ति जीडीपी में 1,156% की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई। इसी एक दशक में यह देश दुनिया के सबसे गरीब देशों में से निकलकर सबसे अमीर देशों की लिस्ट में शामिल हो गया।

कूटनीति और सॉफ्ट पावर का खेल
कतर ने सिर्फ आर्थिक रूप से ही नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भी अपनी पहचान बनाई है। उसने तेल और गैस से होने वाली कमाई को सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर में ही नहीं, बल्कि पर्यटन और सॉफ्ट पावर को बढ़ावा देने में भी लगाया है।

खेल कूटनीति: कतर ने 2022 फीफा विश्व कप की सफल मेजबानी करके दुनिया का ध्यान खींचा। इसके अलावा, इसने कई बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों जैसे प्रो साइकिलिंग रेस, कतर ओपन महिला टेनिस टूर्नामेंट और फॉर्मूला वन ग्रां प्री की भी मेजबानी की है।

मध्यस्थ की भूमिका: कतर को अक्सर “मिडिल ईस्ट का स्विट्जरलैंड” कहा जाता है। इसने खुद को वैश्विक संघर्षों में एक विश्वसनीय मध्यस्थ के रूप में स्थापित किया है। इजराइल-हमास संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध में बच्चों की वापसी के लिए इसने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

 

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