नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने हाई-स्पीड डीजल (HSD) पर बड़ा फैसला लेते हुए एक्साइज ड्यूटी में ₹24 प्रति लीटर और इंफ्रास्ट्रक्चर सेस में ₹36 प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। इस फैसले का सीधा असर ट्रांसपोर्ट सेक्टर और आम जनता की जेब पर पड़ सकता है।
सरकार का कहना है कि इस बढ़ोतरी का उद्देश्य राजस्व बढ़ाना और देश में तेजी से चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास कार्यों के लिए फंड जुटाना है। सड़क, हाईवे और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के विस्तार के लिए सरकार को अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच सरकार अक्सर टैक्स में बदलाव कर अपने राजस्व को संतुलित करने की कोशिश करती है। इसके अलावा, बढ़ते राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए भी यह निर्णय अहम माना जा रहा है।
हालांकि, इस फैसले का असर आम लोगों पर पड़ना तय माना जा रहा है। डीजल महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी, जिससे रोजमर्रा की वस्तुओं जैसे सब्जी, अनाज और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों में इजाफा हो सकता है। इससे महंगाई बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि लंबे समय में यह फैसला इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में मदद करेगा, लेकिन अल्पकाल में आम जनता को महंगाई का सामना करना पड़ सकता है।
