Samay Bhaskar – ActAbhi Review –  4*/5*-

एक फिल्म बना ली, लोगो ने हिट करा दी , दूसरा पार्ट बना दिया, लोगो ने फिर हिट करा दिया और क्या चाहिए ? अब तीसरा पार्ट भी बना दिया तो अब बताओ क्या इस बार भी हिट करवा दें। तो भाई , हिट होने के लिए फिल्म में कुछ तो होना चाहिए। कॉमेडी चाहिए , ड्रामा चाहिए , इमोशन चाहिए और कोई सामाजिक मुद्दा चाहिए और अगर ये सब इस बार भी मिले और लोगो को मज़ा आये यानी पूरा एंटरटेंटमेंट, तो भाई फिल्म का हिट होना तो पक्का है ।

जॉली llb 3 से फैंस को बहुत उम्मीदें थी और वो इस बार भी खरी उतरी है , इसमें फिल्म में आपको मिलेगी अक्षय कुमार की शानदार कॉमेडी , अरशद की लाजबाब टाइमिंग और जज त्रिपाठी का शानदार रंगीला अंदाज़ ।जैसे ट्रेलर में लग रहा था फिल्म उतनी ही कसी हुई है । मेकर्स ने इस बात में कोई कोताही नहीं दिखाई कि तीसरा पार्ट है पहले दो पार्ट हिट हो चुके हैं तो तीसरा पार्ट भी अपने आप हिट हो जायेगा। एक तरफ अक्षय कुमार है तो उसका भी जादू चल जायेगा। और फिल्म हिट हो जाएगी।

कहानी की बात करें तो फिल्म में जॉली 1 अरशद वारसी और जॉली 2 यानि अक्षय कुमार के कन्फूशन से शुरू होती है और फिर से जॉली नाम की मुसीबत इस बार एक नहीं वो भी दो दो , जज त्रिपाठी के सामने फिर से मुसीबतों का पहाड़ खड़ा कर देते हैं । इन दोनों से एक तरफ जज त्रिपाठी परेशान दूसरी तरफ क्लाइंट्स कंफ्यूज , , अक्षय कुमार का नाम जॉली है अरशद वारसी का भी नाम जॉली , अरशद वारसी के क्लाइंट को अक्षय कुमार जॉली बता कर हड़प लेता है और जब इस बात का पता जब जॉली 1 यानी अरशद वारसी को लगता है तो फिर होती है जमकर कॉमेडी और बाहर सारा ड्रामा । फिल्म की कहानी की शुरुआत होती है राजिस्थान से जहाँ पर एक बड़ा ग्रुप बीकानेर टू बोस्टन एक बड़ा प्रोजेट बना चाहता है
जिसका विरोध एक किसान करता है लेकिन सरकारी तंत्र की मिली भगत से वो उस किसान की जमीन हथिया लेते है और इसके बाद वो किसान आत्महत्या कर लेता है। उसकी विधवा एक (NGO ) एन ज़ी ओ के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट का विरोध करती है और केस दिल्ली में जज त्रिपाठी की अदालत में पहुंच जाता है। जज त्रिपाठी की अदालत में आमने सामने होते है जॉली 1 और जॉली 2 और फिर आता है कोर्ट में हसी का तूफ़ान। इसके बाद कहानी में एक ऐसा मोड़ आता है जब दोने जॉली उस बड़े ग्रुप के खिलाफ केस लड़ते है । इसी तरह कहानी आगे बढ़ती है।

फिल्म की पटकथा की बात करे तो वो एक दम कसी हुई है। डायरेक्टर शुभाष कपूर ने अच्छा काम किया है। फिल्म का स्क्रीन प्ले इस बात का सबूत है फिल्म देखते समय आप को कुछ भी ओवर नहीं लगेगा। फिल्म में कॉमेडी के पंच सही काम करते नज़र आते है इसके बाद हर पंच पर आपको हसी आएगी। उसके बाद फिल्म एक दम सीरियस हो जाती है। उसके बाद फिर से एक नया मोड़ , कुल मिला कर फिल्म अपनी बात कहने में सफल रही है। अगर कहा जाए कि ये फिल्म कॉमेडी की प्लेट में परोसी गई एक ऐसी डिश है जो एक बड़े सामाजिक मुद्दे को भरपूर मनोरंजन के साथ दर्शकों के सामने पेश करती है । आपको कुछ भी ओवर नहीं लगेगा।

एक्टिंग की बात करें तो अक्षय कुमार और अरशद वारिस ने बढ़िया काम किया है। देखो ये दोनों फिल्म के हीरो है दर्शक हीरो की एंट्री पर तालिया बजाते है। पर इस बार एक और हीरो है फिल्म में एक और हीरो है और उसके लिए भी आपको ताली बजानी पडेगी वो हीरो है जज त्रिपाठी . जब उनकी एंट्री होती है तो ताली और सीटी बजना तय है ये बात तो पक्की है।

सीमा विस्वास ने किसान की विधवा का किरदार निभाया है। वो जिस तरह की मंझी हुई अभिनेत्री हैं उन्होंने शानदार काम किया है। गजराज राव अपनी भूमिका में अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहे है । राम कपूर भी फिल्म में है लेकिन जिस तरह पहले पार्ट में बोमन ईरानी और दूसरे पार्ट में अन्नू कपूर ने अपनी छाप छोड़ी थी राम कपूर वो करिश्मा नहीं कर पाए। अमृता राव की फिल्म में वापसी हुई है , हुमा कुरैशी फिल्म में शो पीस बानी हुई है।

फिल्म का डायरेक्शन सुभाष कपूर ने किया है और उन्होंने फिल्म का निर्देशन अच्छी तरह किया है। इस बात ध्यान रखा गया है कि फिल्म की पकड़ ढीली ना पड़े । किसी भी जगह कमी नहीं छोड़ी गई है । मेकर्स ने इस बात का ध्यान रखा है कि फिल्म का कोर ,जो कॉमेडी और मनोरंजन है , सामाजिक मुद्दे को दिखाने के चक्कर में कहीं अपनी लय से बिगड़ न जाए ।
कुल मिलकर ये एक अच्छी फिल्म है जो आपको हसाते हसाते अपनी बात ईमानदारी से कहती हुई समाप्त हो जाती है। एक देखने लायक है , ये एक पैसे वसूल फिल्म है। अगर एक अच्छी फिल्म देखना चाहते है। अगर आप खूब हसना और एक गहरी बात को समझना चाहते है , अगर आप अक्षय कुमार के फैन है अरशद वारसी के फैन है या जज त्रिपाठी के फैन है तो ये फिल्म आपको निराश नहीं करेगी।

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