अर्जुन मिश्रा
फिरोजाबाद | शाम के ठीक 6 बजे थे। शहर अपनी रफ़्तार में था कि तभी एक तीखी सायरन की आवाज ने हवा में सिहरन पैदा कर दी। अगले ही पल, पीडी जैन कॉलेज का मैदान किसी गहरी खाई की तरह अंधेरे में डूब गया। यह कोई बिजली की कटौती नहीं थी, बल्कि यह फिरोजाबाद की ‘अग्निपरीक्षा’ थी। प्रशासन यह देख रहा था कि अगर कल आसमान से मौत (हवाई हमला) बरसती है, तो क्या यह शहर खुद को बचाने के लिए तैयार है?
सीमा पार से संभावित हवाई हमलों और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए फिरोजाबाद प्रशासन ने अपनी तैयारी का लोहा मनवाया। शुक्रवार शाम जैसे ही घड़ियों ने छह बजाए, सायरन की गूंज के साथ पीडी जैन कॉलेज मैदान का परिदृश्य बदल गया। चंद सेकंडों के भीतर समूचा परिसर ‘ब्लैक आउट’ के अंधेरे में सिमट गया, जो दुश्मन के लड़ाकू विमानों को भ्रमित करने की एक सामरिक कवायद थी।
अंधेरा बना सुरक्षा कवच: ‘ब्लैक आउट’ का संदेश: इस ड्रिल का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को यह समझाना था कि युद्ध जैसी स्थिति में बिजली की एक छोटी सी किरण भी रिहायशी इलाकों के लिए घातक साबित हो सकती है। आधुनिक युद्ध कौशल में रोशनी दुश्मन के लिए सिग्नल का काम करती है। ऐसे में घरों को पूरी तरह अंधेरे में रखकर हम अपनी और अपने शहर की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।”
आग, राहत और प्राथमिक उपचार का ‘लाइव’ डेमो : मैदान के एक हिस्से में भड़की आग पर काबू पाने के लिए दमकल विभाग की गाड़ियों ने ‘क्विक रिस्पॉन्स’ का प्रदर्शन किया। वहीं, नागरिक सुरक्षा और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमों ने घायल युवक को रेस्क्यू कर दिखाया। इस दौरान: डॉक्टरों ने बताया कि चोट लगने के शुरुआती मिनटों में दिया गया प्राथमिक उपचार कैसे जान बचा सकता है।
भीड़भाड़ वाले इलाकों से घायलों को सुरक्षित निकालने की तकनीक का प्रदर्शन किया गया।
प्रशासनिक तालमेल की मिसाल: इस अभ्यास में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, पुलिस, राजस्व, नगर निगम और विद्युत विभाग के बीच बेहतरीन समन्वय दिखा। साथ ही एनसीसी, एनएसएस और नेहरू युवा केंद्र के स्वयंसेवकों ने नागरिक सुरक्षा की अग्रिम पंक्ति के रूप में अपनी भूमिका निभाई।
