Cinema70 mm- Review By ActAbhi – 2*/5* –
फिल्मों को मनोरंजन के लिया बनाया जाता है और फिल्में मनोरंजन करती है ऐसा सोचकर अक्सर दर्शक सिनेमाघरों में जाते है लेकिन हर बार कहीं ना कहीं दर्शक ठगे जाते है । कुछ भी बना दो कुछ भी दिखा दो , कॉमेडी के नाम पर नंगे हो जाओ डबल मीनिंग डायलॉग बोलो और एक बेसर पैर का सिनेमा बना दो । पैसा है तो फ़िल्म बन सकती है , पैसा है तो फ़िल्म 5000 स्क्रीन के साथ रिलीज़ हो सकती है , पैसा है तो बड़े फ़िल्मी सितारे भी आ सकते है , पैसे से राइटर भी आ सकते है । मगर इतना सब होने के बाद भी फ़िल्म मनोरंजन नहीं कर पाती, दर्शकों को हसा नहीं पाती , जबकि ऐसी भी फिल्में आ चुकी है जो आज भी बार बार देखी जाती है मगर आज ऐसा क्यों नहीं हो रहा है । ये सोचने वाली बात है ? आज के बॉलीवुडिया फिल्म बनाने वाले जानते हैं कि हिन्दी सिनेमा में चार बड़े स्टार लो, दो चार गाने, दो चार बड़ी एक्ट्रेस ग्लैमर के लिए और फिर बना दो फ़िल्म, रहा कमाई का तो वो तो निकल ही आएगा।
अक्षय कुमार के साथ एक दर्जन से ज्यादा एक्ट्स भीड़ के शोर के साथ हाउसफुल सीरीज़ की फिल्म हाउसफुल 5 सिनेमा घरो में दो वर्जन के साथ रिलीज़ हो चुकी है।हाउसफुल 5 A हाउसफुल 5 बी। अब फिल्म को चलाने के लिए दो क्लाइमेक्स करने पड़ रहे हैं। इस बात से आप समझ सकते है की क्या कबाड़ा किया होगा। इस बार फिल्म में नाना पाटेकर भी दिखाई देंगे।
फिल्म की कहानी – ‘हाउसफुल 5’ की कहानी एक क्रूज शिप पर हुए मर्डर की गुत्थी के इर्द-गिर्द घूमती है अभिनेता रंजीत जो की एक करोड़पति हैं अपनी मौत के बाद उनकी वसीयत में अपनी संपत्ति अपने उत्तराधिकारी ‘जॉली’ को देने का ऐलान करते हैं। इसके बाद एक के बाद एक जॉली के आने का सिलसिला शुरू हो जाता है। उस दुविधा को दूर करने के लिए डॉक्टर से तीनो जॉली का dna टेस्ट करने को कहा जाता है और इसके बाद शुरू होता है मर्डर का सिलसिला। इसके बाद पहले डॉक्टर का मर्डर हो जाता है और इसके बाद दो और मर्डर हो जाते है। मर्डर का शक तीनो जॉली पर जाता है। और लास्ट में कातिल को नाना पाटेकर जो की एक ब्रिटिश पुलिस अफसर हैं सबके सामने लाते है। लेकिन इसमें एक ट्वीस्ट है एक फिल्म के दो क्लाइमेक्स है यानी दो अलग अलग फिल्म A और बी।
पटकथा – इसके बारे में क्या ही कहें। फिल्म बनाने वालों को लगता है कि दर्शकों को कुछ भी दिखा दो। पटकथा के नाम फिल्म में कुछ है ही नहीं । वो ही पुराना बचा हुआ मसाला नई बोतल में डाल कर बेचा जा रहा है। फिल्म के दो क्लाइमैक्स है यानी दो अलग अलग फिल्म। जब डायरेक्टर और राइटर ही अपनी कहानी से संतुष्ट नहीं लगते तो उन्होंने सोचा की क्लाइमेक्स को अलग अलग कर देते है और दर्शक अपना पैसा और कीमती समय यह तय करने में लगाए की कौन सा बेहतर है। अगर इसको घटिया कहें तो ठीक होगा बाकी दर्शक खुद समझदार हैं। संवाद यानी डायलॉग की बात करें तो क्योकि अक्षय कुमार की कॉमिक टाइमिंग बेहतरीन हैं इस के अलावा एक दो को छोड़ दे तो पूरी फिल्म में हँसाने की कोशिश हो रही है।
अभिनय – इस फिल्म में सितारों की भीड़ दिखाई देती है बड़े बड़े नाम पर , अभिनय की बात करें तो अक्षय कुमार ने थोड़ा बहुत हँसाने की कोशिश की है बाकि एक्टर क्या कर रहें है ये बात बता नहीं सकते है। अभिषेक बच्चन फिल्म में क्यों हैं इस बात की भी जांच जारी है। नाना पाटेकर जैसे बड़े और शानदार एक्टर का कोई उपयोग नहीं किया गया है। बाकी एक भीड़ है और आप तो समझ सकते हैं की भीड़ क्या करती है जब बेकाबू हो जाती है।
फिल्म क्यों देखें – फिल्मों को मनोरंजन के लिया बनाया जाता है और फिल्में मनोरंजन करती है इस एक बात को पैमाना माना जाए तो ये फिल्म पूरी तरह से एक डिब्बा फिल्म है। ना ही फिल्म में कॉमेडी है न ही थ्रिल है। कुल मिलाकर कहा जाये तो पैसा और समय की बर्बादी। बाकी दर्शक फिल्म देखकर अपना निर्णय लेने के लिए फ्री है ।
