भारतीय वायुसेना की ताकत में होगा बड़ा इजाफा, 96 राफेल भारत में बनेंगे, मेक इन इंडिया को बढ़ावा

नई दिल्ली।
भारतीय वायुसेना (IAF) की हवाई शक्ति को नई ऊंचाई मिलने जा रही है। भारत के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी रक्षा डील को मंजूरी मिल गई है। India Today के रक्षा सूत्रों के अनुसार, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में 114 राफेल मल्टी-रोल फाइटर जेट की खरीद के लिए 3.25 लाख करोड़ रुपये की Acceptance of Necessity (AoN) को मंजूरी दे दी गई है। यह सौदा न केवल भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत करेगा, बल्कि मेक इन इंडिया अभियान को भी नई गति देगा।

मेक इन इंडिया के तहत होगा निर्माण

रिपोर्ट के मुताबिक, इस डील के तहत—

  • 18 राफेल विमान फ्रांस से सीधे आयात किए जाएंगे

  • 96 राफेल लड़ाकू विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा

फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन भारतीय निजी कंपनियों के साथ मिलकर इन विमानों का निर्माण करेगी।

इस डील के बाद भारत के पास कुल 176 राफेल विमान हो जाएंगे, जिनमें 36 पहले से वायुसेना में शामिल हैं, 114 नए होंगे और 26 राफेल भारतीय नौसेना के लिए होंगे।

फ्रांस के राष्ट्रपति के दौरे से जुड़ा फैसला

यह ऐतिहासिक फैसला ऐसे समय लिया गया है जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन 18 फरवरी के आसपास भारत दौरे पर आने वाले हैं। संभावना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मैक्रॉन के बीच इस डील को अंतिम रूप दिया जाएगा।

🔴 114 राफेल डील की 5 बड़ी बातें

  1. यह डील भारत की अब तक की सबसे बड़ी रक्षा डील है, जिसकी कीमत 3.25 लाख करोड़ रुपये (लगभग 39 बिलियन डॉलर) है।

  2. भारतीय वायुसेना को 88 सिंगल-सीटर और 26 ट्विन-सीटर राफेल विमान मिलेंगे।

  3. 96 विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा।

  4. शुरुआत में 30% स्वदेशी कंटेंट, जिसे बढ़ाकर 60% से अधिक किया जाएगा।

  5. हैदराबाद में M-88 इंजन के लिए MRO फैसिलिटी स्थापित होगी।


⏰ कब तक मिलेंगे राफेल विमान?

DAC से मंजूरी मिलने के बाद अब सौदे पर औपचारिक बातचीत होगी। इसके बाद प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) अंतिम मंजूरी देगी।
अनुमान है कि 2030 तक राफेल विमानों की डिलीवरी शुरू हो सकती है।

Share.
Exit mobile version