Money Gullak Desk | Mumbai
अचानक पैसों की जरूरत पड़ने पर मिनटों में लोन देने वाले डिजिटल लेंडिंग ऐप्स पर अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) पूरी तरह नकेल कसने जा रहा है। अक्सर लोग बैंक के लंबे प्रोसेस से बचने के लिए मोबाइल ऐप्स से 10,000 या 20,000 रुपये का छोटा लोन ले लेते हैं। इसके बाद शुरू होता है 30 से 40 प्रतिशत तक का भारी-भरकम ब्याज, प्रोसेसिंग फीस की मोटी कटौती और हिडन चार्जेस का खतरनाक चक्रव्यूह।
आम जनता को इस वित्तीय जाल और कर्ज के दलदल से बचाने के लिए केंद्रीय बैंक ने एक बड़ा नीतिगत कदम उठाया है। इस नए नियम के तहत छोटे लोन लेने वाले ग्राहकों को सीधी राहत देने का खाका तैयार किया गया है।
क्या है RBI का नया 2026 ड्राफ्ट नियम?
रिजर्व बैंक ने हाल ही में “Draft Reserve Bank of India (Interest Rates on Loans and Advances) Directions, 2026” का मसौदा जारी किया है। इस ड्राफ्ट का सीधा मकसद उन लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स और वित्तीय संस्थाओं पर अंकुश लगाना है, जो मजबूरी का फायदा उठाकर अत्यधिक ब्याज दरें वसूलते हैं।
इस नए प्रस्ताव के अनुसार, 50,000 रुपये या उससे कम राशि के सभी छोटे और माइक्रो-लोन (Small Value Loans) पर ब्याज दर की एक अधिकतम सीमा (Interest Cap) तय की जाएगी। इसके लागू होने के बाद कोई भी बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) या फिनटेक लेंडर तय सीमा से अधिक ब्याज नहीं ले सकेगा।
हिडन चार्जेस और मनमाने शुल्कों का खेल होगा खत्म
अक्सर डिजिटल लेंडर्स कम ब्याज का दावा करते हैं, लेकिन लोन डिस्बर्सल के वक्त फाइल चार्ज, इंश्योरेंस और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर बड़ी रकम पहले ही काट लेते हैं। नए नियमों के तहत अब कंपनियों को अपने सभी खर्चों को एनुअल पर्सेंटेज रेट (APR) के रूप में पारदर्शी तरीके से बताना होगा।
इसके साथ ही, ग्राहकों को लोन एग्रीमेंट के समय एक की-फैक्ट स्टेटमेंट (KFS) देना अनिवार्य होगा, ताकि उधारकर्ता को पहले दिन से ही पता हो कि उसे कुल कितनी रकम लौटानी है। केंद्रीय बैंक ने इस पूरे ड्राफ्ट पर सभी स्टेकहोल्डर्स और आम जनता से 11 सितंबर 2026 तक सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। इसके बाद इन दिशानिर्देशों को 1 अप्रैल 2027 से देशभर में पूरी तरह लागू करने की योजना है।
रिकवरी एजेंटों की बदसलूकी और उत्पीड़न पर सख्त पाबंदी
ब्याज दरों के अलावा, लोन ऐप्स के रिकवरी एजेंटों द्वारा ग्राहकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की शिकायतों पर भी कड़ा रुख अपनाया गया है। आरबीआई ने पहले से तय आचार संहिता को और अधिक सख्त बनाते हुए साफ निर्देश दिए हैं।
अब कोई भी रिकवरी एजेंट सुबह 8 बजे से पहले और शाम 7 बजे के बाद ग्राहकों को न तो कॉल कर सकता है और न ही उनके पते पर जा सकता है। इसके अलावा फोन पर अनुचित भाषा का प्रयोग करना, धमकी देना या ग्राहक की कॉन्टैक्ट लिस्ट में मौजूद रिश्तेदारों व परिचितों को कॉल करके बदनाम करना सख्त कानूनी अपराध के दायरे में रखा गया है।
