नई दिल्ली।आकाश प्राइम मिसाइल सिस्टम ऊंचाई वाले बॉर्डर एरिया पर नजर रखने के लिए बेहद अहम है। जिससे दुश्मनों की नापाक हरकत को वहीं ध्वस्त कर दिया जाए।लद्दाख में 15,000 फीट ऊंचाई पर इसकी कामयाबी ने साबित कर दिया कि भारत अब उन्नत हथियार बना सकता है।आकाश और आकाश प्राइम दोनों ही 25 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन के विमानों, हेलीकॉप्टरों और ड्रोन को मार गिराने में सक्षम हैं। हालांकि,अब आकाश प्राइम को 4,500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों के लिए बनाया गया है। इसमें बेहतर ग्राउंड सिस्टम, रडार और रेडियो फ्रीक्वेंसी सिस्टम लगे हैं।

DRDO ने डेवलप किया आकाश न्यू जेनरेशन हथियार सिस्टम
भारतीय वायुसेना ने पहले ही 10,900 करोड़ रुपये में आकाश के 15 स्क्वाड्रन का ऑर्डर दिया है। टीओआई ने पहले ही इसकी जानकारी दी थी। DRDO ने आकाश न्यू जेनरेशन हथियार सिस्टम भी विकसित किया है। इसकी शुरुआती मारक क्षमता 30 किलोमीटर है, जिसे बाद में और बढ़ाया जाएगा।

क्यों खास है नया आकाश प्राइम मिसाइल
आकाश-एनजी का पहला परीक्षण जनवरी 2021 में किया गया था। इसमें छोटे आकार की मिसाइलें, आधुनिक रेडियो फ्रीक्वेंसी सीकर,लांचर, मल्टी-फंक्शन रडार और कमांड, कंट्रोल और कम्युनिकेशन सिस्टम हैं। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि आकाश-एनजी एक कैनिस्टर-आधारित सिस्टम है। इससे ऑपरेशन में ज्यादा आसानी होगी। प्रत्येक कैनिस्टर में छह मिसाइलें हो सकती हैं। इसके शामिल होने से दुश्मन को मार गिराने की संभावना और बढ़ जाएगी।नई आकाश प्राइम मिसाइलें पहले की तुलना में ज्यादा पावरफुल हैं और बेहतर प्रदर्शन करने में सक्षम हैं। इसका मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान और चीन पर कड़ी नजर रखना है। खास तौर से पहाड़ी सीमाओं या फिर ऊंचे स्थानों पर दुश्मनों के विमानों की घुसपैठ को नाकाम करने में ये मिसाइल सिस्टम अहम रोल निभाएगा। ऊंचाई वाले बॉर्डर एरिया में ऑपरेशन के लिए ये मिसाइल सिस्टम बेहद उपयोगी साबित होगी।

मारक क्षमता से लेकर आकाश प्राइम में कई सुधार
आकाश प्राइम सिस्टम में कई सुधार किए गए हैं। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने इसे डिजाइन किया है और भारत डायनेमिक्स ने इसका उत्पादन किया है। सेना से मिली जानकारी के आधार पर इसे और बेहतर बनाया गया है। मार्च 2023 में 8,160 करोड़ रुपये के एक समझौते के तहत, आर्मी एयर डिफेंस (AAD) आकाश प्राइम सिस्टम के दो नए रेजिमेंट बना रही है। इसके साथ ही, सेना के पास आकाश के दो और रेजिमेंट भी होंगे।

Share.
Exit mobile version