नई दिल्ली। रक्षाबंधन भाई बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है। रक्षाबंधन आज 9 अगस्त शनिवार 2025 को देश भर में मनाया गया। रक्षाबंधन का त्यौहार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। द्वापर युग में श्री कृष्णा की बहन सुभद्रा थी,जो अपने भाई यानी कृष्ण से काफी ज्यादा स्नेह करती थी।जब कृष्ण युद्ध के लिए जा रहे थे,तो सुभद्रा को उनकी काफी ज्यादा चिंता थी। द्वापर युग में युद्ध पर जाने से पहले सुभद्रा ने कृष्ण भगवान की सुरक्षा के लिए उनके दाएं हाथ में रक्षा सूत्र बांधा था।जिसका वर्णन कई धार्मिक ग्रंथो में किया गया है। रक्षाबंधन का पर्व द्वापर युग से ही चला आ रहा है। बहनें भाई के दाएं हाथ पर रक्षा सूत्र यानी राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र की कामना करते हुए निरोग रहने की प्रार्थना करती हैं और भाई जीवन भर उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं।हिंदू धर्म में रक्षाबंधन का त्योहार 5 हजार साल से भी अधिक पुराना है,जो द्वापर युग से चल रहा है। इस त्यौहार का संबंध विष्णु भगवान के आठवें अवतार श्री कृष्ण और सुभद्रा से है। सुभद्रा ने अपने भाई की रक्षा के लिए कृष्ण की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी रक्षा की थी।

राजा बलि और लक्ष्मी की राखी से जुड़ी कहानी
रक्षाबंधन की शुरुआत की बात करें तो सबसे पुरानी कहानी राजा बलि और देवी लक्ष्मी की मानी जाती है। कहते हैं, जब राजा बलि ने अपनी तपस्या से देवताओं को भी संकट में डाल दिया, तो भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर उससे तीन पग जमीन मांगी। विष्णु जी ने दो कदम में ही सारा संसार नाप लिया और तीसरे के लिए राजा बलि ने अपना सिर झुका दिया। भगवान राजा बलि की भक्ति से खुश हुए और उनसे वरदान मांगने को कहा। इसपर बलि ने विष्णु जी से हमेशा उसके साथ रहने को कहा जिसके बाद भगवान बलि के द्वारपाल बन गए।
तब देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को स्वर्ग लौटाने के लिए साधारण महिला का रूप लिया और बलि के पास पहुंचीं। माता ने बलि को राखी बांधकर भाई बना लिया। उपहार में लक्ष्मी जी ने विष्णु जी को साथ ले जाने की बात कही, और बलि ने सहमति दे दी। कहते हैं, वो दिन श्रावण पूर्णिमा का था और तभी से ये परंपरा शुरू हुई कि बहनें राखी बांधती हैं और भाई उनकी रक्षा का वादा करते हैं।आज भी जो रक्षासूत्र बांधते समय मंत्र पढ़ा जाता है, उसमें राजा बलि को याद किया जाता है- “येन बद्धो बली राजा, दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामनुबध्नामि, रक्षे मा चल मा चल॥”

रक्षाबंधन से जुड़ी इंद्र और इंद्राणी की कथा
भविष्य पुराण के अनुसार जब देवासुर संग्राम में इंद्र असुरों से हार रहे थे, तब उनकी पत्नी इंद्राणी ने एक रक्षा सूत्र तैयार करके इंद्र की कलाई पर बांधा। जिससे इंद्र देव ने युद्ध में विजय प्राप्त की। कहा जाता है कि इस घटना के बाद से ही रक्षासूत्र बांधने की परंपरा की शुरुआत हुई थी। कालांतर में यह त्योहार भाई-बहनों का त्योहार बन गया। आज के समय में बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी सुरक्षा की कामना करती हैं।

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