नई दिल्ली। सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को भारत के नए उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में एक समारोह में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी मौजूद थे।सीपी राधाकृष्णन ने हाल ही में हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार पूर्व जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी को 152 मतों के बड़े अंतर से हराया था। यह चुनाव जगदीप धनखड़ के स्वास्थ्य कारणों से अचानक इस्तीफे के बाद 9 सितंबर को कराया गया था, जबकि उनका कार्यकाल अभी दो साल बचा हुआ था।
महाराष्ट्र के राज्यपाल पद से दिया था इस्तीफा
उपराष्ट्रपति चुने जाने के बाद, सीपी राधाकृष्णन ने महाराष्ट्र के राज्यपाल पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद, राष्ट्रपति मुर्मू ने गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को महाराष्ट्र का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है।
सीपी राधाकृष्णन का राजनीतिक सफर
67 वर्षीय सीपी राधाकृष्णन का राजनीतिक सफर काफी लंबा रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े सीपी राधाकृष्णन ने भाजपा में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। वह 2004 से 2007 तक तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे। उन्हें संगठन और प्रशासन दोनों में मजबूत पकड़ वाला नेता माना जाता है। उनके समर्थक उन्हें ‘तमिलनाडु का मोदी’ भी कहते हैं।
वह दो बार, 1998 और 1999 में, कोयंबटूर से लोकसभा सांसद चुने गए थे। इसके अलावा, वह झारखंड और महाराष्ट्र के राज्यपाल भी रह चुके हैं।सांसद रहते हुए वह संसदीय स्थायी समिति (कपड़ा मंत्रालय) के अध्यक्ष रहे। इसके अलावा, वह स्टॉक एक्सचेंज घोटाले की जांच के लिए बनी विशेष संसदीय समिति के सदस्य थे। 2004 में संसदीय प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में राधाकृष्णन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया था। वह ताइवान जाने वाले पहले संसदीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भी थे।2016 में उन्हें कोच्चि स्थित कॉयर बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया, जहां उन्होंने चार साल तक काम किया। उनके नेतृत्व में भारत से नारियल रेशे के निर्यात रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई थी।
