Samay Bhaskar Cinema Desk Mumbai –
“हिंदुस्तान जिंदाबाद था, जिंदाबाद है और जिंदाबाद रहेगा…”
बड़े पर्दे पर पाकिस्तान के छक्के छुड़ाने वाले और अपने ढाई किलो के हाथ से दुश्मनों को धूल चटाने वाले बॉलीवुड के असली ‘एंग्री यंग मैन’ सनी देओल इन दिनों सोशल मीडिया पर तीखी ट्रोलिंग का सामना कर रहे हैं। जो फैंस कल तक सनी पाजी के ‘गदर’ अवतार पर सिनेमाघरों में तालियां बजाते नहीं थकते थे, वही आज उनसे खासे नाराज नजर आ रहे हैं।
इस पूरे बवाल की वजह बना है बिहार की राजधानी पटना में दिया गया सनी देओल का एक ऐसा बयान, जिसने इंटरनेट से लेकर आम जनता के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। आखिर सनी पाजी ने ऐसा क्या कह दिया? उनकी आने वाली फिल्म ‘बंटवारा 1947’ किस बारे में है? और क्या इस एक बयान से उनकी कट्टर देशभक्त वाली छवि को झटका लगा है? आइए विस्तार से समझते हैं।
जब सनी पाजी के मुंह से निकला—”पाकिस्तान मेरी मौसी है”
मामला शुरू होता है सनी देओल की अगली बड़ी फिल्म ‘बंटवारा 1947’ के प्रमोशनल इवेंट से। सनी देओल इन दिनों देश के अलग-अलग शहरों में जाकर अपनी इस फिल्म का प्रमोशन कर रहे हैं। हाल ही में जब वे पटना पहुंचे, तो एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकार ने उनसे सवाल पूछा—“आप पाकिस्तान को एक देश के रूप में कैसे देखते हैं?”
इस सवाल पर सनी देओल ने जो जवाब दिया, उसकी उम्मीद शायद वहां मौजूद किसी को भी नहीं थी। अपने पिता और दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के पुराने विचारों का हवाला देते हुए सनी पाजी ने कहा:
अगर भारत मेरी मां है, तो पाकिस्तान मेरी मां की बहन यानी मेरी मौसी है। हम सभी कहीं न कहीं एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
जैसे ही यह बयान सोशल मीडिया पर आया, भूचाल आ गया। लोग इस बात पर हैरान रह गए कि फिल्मों में पाकिस्तान को नेस्तनाबूद करने और हैंडपंप उखाड़ने की बात करने वाले सनी देओल असल जिंदगी में उसे ‘मौसी’ का दर्जा कैसे दे रहे हैं।
क्या है फिल्म ‘बंटवारा 1947’ की कहानी, जिसके चक्कर में हुआ विवाद?
जिस फिल्म के प्रमोशन के दौरान यह पूरा विवाद खड़ा हुआ है, उसका नाम ‘बंटवारा 1947’ है। यह फिल्म 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन के दर्द, त्रासदी और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित एक बड़ा पीरियड ड्रामा है।
फिल्म को लेकर ट्रेड और दर्शकों के बीच पहले से ही भारी बज बना हुआ है, क्योंकि इसके साथ तीन बड़े नाम जुड़े हैं:
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प्रोडक्शन: आमिर खान प्रोडक्शंस
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डायरेक्टर: राजकुमार संतोषी (जिन्होंने सनी के साथ ‘घायल’ और ‘दामिनी’ जैसी कल्ट फिल्में बनाई हैं)
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लीड रोल: खुद सनी देओल
सनी देओल ने इवेंट में स्पष्ट किया कि वे एक कलाकार और कहानीकार हैं। फिल्म का मकसद नफरत फैलाना नहीं, बल्कि उस दौर के सच और इंसानी रिश्तों के ताने-बाने को दिखाना है। उन्होंने यह भी साफ किया कि फिल्म की पूरी शूटिंग पाकिस्तान में नहीं, बल्कि भारत की धरती पर ही हुई है। हालांकि, जनता का ध्यान फिल्म से ज्यादा सनी के ‘मौसी’ वाले बयान पर अटक गया है।
इंटरनेट दो गुटों में बंटा: क्या ‘गदर’ वाली छवि को लगा झटका?
सनी देओल के इस रुख के बाद सोशल मीडिया पर जनता दो हिस्सों में बंट गई है:
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नाराज फैंस का पक्ष: ट्रोलर्स और नाराज फैंस का कहना है कि दोनों देशों के बीच बने मौजूदा सीमा तनाव और ऐतिहासिक दर्द को देखते हुए पाकिस्तान की तुलना ‘मौसी’ से करना सही नहीं है। कई लोगों का तर्क है कि स्क्रीन पर देशभक्ति दिखाना महज एक्टिंग थी और अब उनका असली चेहरा सामने आ गया है। कुछ ट्रेंड्स में तो फिल्म के बहिष्कार (#Boycott) तक की मांग उठने लगी है।
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समर्थकों का पक्ष: वहीं, सनी देओल के प्रशंसकों का मानना है कि उन्होंने एक कलाकार के रूप में शांति और अमन की बात की है। बंटवारे से पहले दोनों मुल्क एक ही थे और उन्होंने केवल अपने पिता धर्मेंद्र की सोच को सम्मान दिया है। इसे बेवजह राजनीति से जोड़कर तूल नहीं दिया जाना चाहिए।
फिल्म समीक्षकों (Critics) का मानना है कि सनी देओल की असली यूएसपी उनका कट्टर राष्ट्रवाद रहा है। ऐसे में उनका यह ‘सॉफ्ट स्टैंड’ उनके उस पारंपरिक दर्शक वर्ग को हजम नहीं हो रहा, जो थिएटर में सिर्फ उनका एक्शन देखने जाता है।
विवाद का फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर क्या असर पड़ेगा?
अब सबसे बड़ा सवाल—क्या इस विवाद से फिल्म फ्लॉप होगी या इसे पब्लिसिटी का बंपर फायदा मिलेगा?
सिनेमा जगत में अक्सर कहा जाता है कि “Bad publicity is also good publicity” यानी बदनामी में भी नाम होता है। यह फिल्म 14 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) के वीकेंड पर सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है।
विवाद के चलते ‘बंटवारा 1947’ इस समय हर न्यूज चैनल और सोशल मीडिया टाइमलाइन पर ट्रेंड कर रही है। ट्रेड एनालिस्ट्स के मुताबिक, इस मुफ्त की पब्लिसिटी से उन दर्शकों का ध्यान भी फिल्म की तरफ गया है जिन्हें इसके बारे में जानकारी नहीं थी। यह बज फिल्म को एक शानदार ओपनिंग दिला सकता है, हालांकि लंबी दौड़ में फिल्म की कहानी और कंटेंट का दम ही तय करेगा कि यह ब्लॉकबस्टर बनती है या नहीं।