Samay Bhaskar Cinema Desk | Mumbai
समीक्षक: अभिषेक (Act Abhi)
साल 2018 में जब भारतीय ओटीटी स्पेस में एक्सेल एंटरटेनमेंट की वेब सीरीज ‘मिर्ज़ापुर’ आई थी, तो उसने देसी क्राइम ड्रामा की परिभाषा बदलकर रख दी थी। 3 सुपरहिट सीजन और 26 एपिसोड्स तक कालीन भैया, गुड्डू पंडित और मुन्ना भैया के किरदारों ने मोबाइल स्क्रीन पर राज किया। सीजन 3 के धीमे पेसिंग के बाद जब कुछ दर्शकों को लगा कि मिर्ज़ापुर की चमक फीकी पड़ रही है, तभी मेकर्स ने इस फ्रेंचाइजी को सीधे सिनेमाघरों के 70mm पर्दे पर उतारने का बड़ा फैसला लिया।
फिल्म के निर्माता फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी के अनुसार, इस फिल्म का निर्माण सिर्फ व्यावसायिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि दुनिया भर के उन फैंस की भारी मांग पर किया गया है जो मुन्ना भैया के स्वैग को सिनेमाघरों के बड़े साउंड सिस्टम और कैनवास पर देखना चाहते थे। लेकिन क्या यह फिल्म सच में उस उम्मीद पर खरी उतरती है या सिर्फ ब्रांड के नाम पर भुनाने की कोशिश है? आइए पढ़ते हैं इस फिल्म का संपूर्ण और निष्पक्ष रिव्यू।
1. कहानी की रूपरेखा: सीजन 4 नहीं, बल्कि एक ओरिजिन प्रिक्वेल
बिना कोई स्पॉइलर दिए अगर कहानी के प्लॉट की बात करें, तो यह फिल्म कोई ‘सीजन 4’ की सीधी कड़ी नहीं है। मेकर्स ने बड़ी चालाकी से इसे मिर्ज़ापुर की दुनिया का एक प्रिक्वेल (Prequel) बनाया है।
कहानी दर्शकों को वापस साल 2018 के उस दौर में ले जाती है जहाँ से पूर्वांचल की खूनी गद्दी की लड़ाई शुरू हुई थी। फिल्म में उन अनछुए पहलुओं को दिखाया गया है कि कैसे अखंडानंद त्रिपाठी यानी कालीन भैया ने अपने शांत लेकिन खौफनाक रसूख को खड़ा किया, पंडित परिवार और त्रिपाठी खानदान के बीच नफरत की पहली नींव कैसे पड़ी, और मुन्ना भैया की मनमानी व सनक का शुरुआती दौर कैसा था। प्रिक्वेल होने के कारण पुराने दर्शकों के लिए कई नॉस्टैल्जिक मोमेंट्स हैं, जबकि कुछ नए ट्विस्ट कहानी में ताज़गी बनाए रखते हैं।
2. सरप्राइज पैकेज: रवि किशन का देसी स्वैग और ‘सचिव जी’ का अनोखा कैमियो
फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी इसकी नई कास्टिंग और अप्रत्याशित कैमियो हैं:
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रवि किशन की धमाकेदार एंट्री: पूर्वांचल की मिट्टी के मिजाज को पर्दे पर जीवंत करने में रवि किशन माहिर हैं। फिल्म में उनकी एंट्री बिल्कुल कड़क और प्रभावशाली है। उनका देसी अंदाज, भारी-भरकम डायलॉग डिलीवरी और ठसक सीधे तौर पर पंकज त्रिपाठी के संजीदा अभिनय के सामने एक मजबूत संतुलन बनाती है।
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जितेंद्र कुमार (सचिव जी) की मौजूदगी: फिल्म का सबसे बड़ा चौंकाने वाला पहलू ‘पंचायत’ सीरीज के सीधे-साधे ‘सचिव जी’ यानी अभिषेक त्रिपाठी (जितेंद्र कुमार) का इस हिंसक दुनिया में नजर आना है। जहाँ हर कोई बंदूकें चला रहा हो और अपशब्द बोल रहा हो, वहाँ सचिव जी का मासूम चेहरा सिचुएशनल ह्यूमर और रोमांच दोनों पैदा करता है, जो थिएटर में बैठे दर्शकों को खूब हंसाता भी है।
3. डायरेक्शन और टेक्निकल डिपार्टमेंट: क्या यह सिर्फ एक लंबा एपिसोड लगता है?
निर्देशक गुरमीत सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि यह फिल्म किसी वेब सीरीज का लंबा खिंचा हुआ एपिसोड न लगे। उन्होंने सिनेमाई कैनवास पर विशेष ध्यान दिया है:
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सिनेमैटोग्राफी: मिर्ज़ापुर की धूल भरी गलियां, कट्टे-तमंचों का व्यापार और पूर्वांचल के देहाती लोकेशन बड़े पर्दे पर काफी रॉ और रियल नजर आते हैं।
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बैकग्राउंड स्कोर (BGM): फिल्म का साउंड डिजाइन और बैकग्राउंड म्यूजिक सिनेमा हॉल के डॉल्बी स्पीकर्स पर जबरदस्त गूंज पैदा करता है। एक्शन सीन्स और मुन्ना भैया की एंट्री पर बीजीएम रोंगटे खड़े कर देता है।
4. कहाँ चूक गई फिल्म? (नेगेटिव पॉइंट्स)
तारीफों के बीच एक निष्पक्ष क्रिटिक के तौर पर फिल्म की उन कमजोरियों को भी सामने रखना जरूरी है जो सिनेमा हॉल में दर्शकों को खल सकती हैं:
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लंबाई और धीमा सेकंड हाफ: फिल्म को अत्यधिक भव्य बनाने की कोशिश में इसकी लंबाई काफी बढ़ गई है। मध्यांतर (इंटरवल) के बाद कहानी कुछ जगहों पर खिंची हुई महसूस होती है और इसकी पेसिंग लड़खड़ाती है।
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डायलॉग्स का दोहराव: स्वैग और लाउडनेस पैदा करने के चक्कर में कुछ डायलॉग्स पुराने और दोहराए हुए लगते हैं। राइटिंग टीम के पास कई जगहों पर नए प्रभावी शब्दों की कमी साफ झलकती है।
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अत्यधिक हिंसा और लाउडनेस: फिल्म में खून-खराबा, कट्टों की गोलियां और अपशब्दों की भरमार है। यह सिनेमा हॉल में फैमिली दर्शकों के लिए बिल्कुल उपयुक्त नहीं है; यह केवल और केवल ‘A’ रेटेड हार्डकोर प्रशंसकों के लिए बनाई गई है।
5. वर्डिक्ट: क्या आपको टिकट बुक करना चाहिए?
यदि आप ‘मिर्ज़ापुर’ फ्रेंचाइजी के कट्टर प्रशंसक हैं, कालीन भैया के धीमे संवाद और मुन्ना भैया के पागलपन भरे स्वैग को बड़े पर्दे पर एंजॉय करना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए एक पैसा वसूल ‘वन-टाइम वॉच’ मास एंटरटेनर है। लेकिन यदि आप किसी बेहद कसी हुई, तार्किक और क्लासिक सिनेमाई मास्टरपीस की तलाश में हैं, तो शायद यह आपको थोड़ा निराश करे।
