विराट हिंदू सम्मेलन: संतों और विचारकों ने भरी हुंकार, कहा— एकजुटता ही लव जिहाद और सांस्कृतिक प्रहार का एकमात्र जवाब
हजारों की संख्या में उमड़ी मातृशक्ति; कलश यात्रा से गूंज उठा नगर
अर्जुन मिश्रा
फिरोजाबाद। देश में गहराते सांस्कृतिक संकट और उभरती चुनौतियों के बीच हिंदू समाज अब अपनी रक्षा और स्वाभिमान के लिए उठ खड़ा हुआ है। जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर योगी नवलगिरि जी महाराज ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिस प्रकार हनुमान जी अपनी शक्ति भूल गए थे और जाम्बवंत ने उन्हें स्मरण कराया, आज वही भूमिका संत समाज निभा रहा है।
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि लव जिहाद और धर्म के विरुद्ध रचे जा रहे तमाम षड्यंत्र हिंदुओं की एकजुटता के आगे सफल नहीं होंगे। यह विचार उन्होंने ‘वीर हनुमान हिंदू सम्मेलन समिति’ द्वारा आयोजित विशाल हिंदू सम्मेलन में व्यक्त किए। आयोजन में उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण था कि हिंदुत्व की लहर अब समाज के हर वर्ग तक पहुँच चुकी है।
पाश्चात्य विकृति और रील संस्कृति पर तीखा प्रहार
सम्मेलन के विशिष्ट अतिथि और प्रख्यात कवि सुदीप भोला ने अपनी धारदार कविताओं से समाज में घर कर रही कुरीतियों पर प्रहार किया। उन्होंने कहा कि “जब हम बंटे तब हम घटे”। उन्होंने सोशल मीडिया की ‘रील संस्कृति’ और पाश्चात्य अंधानुकरण को पारिवारिक विघटन का मुख्य कारण बताया। भोला ने अयोध्या में रामलला के आगमन का जिक्र करते हुए उन लोगों पर भी कटाक्ष किया जिन्होंने मंदिर निर्माण पर सवाल उठाए थे।
नारी शक्ति: प्रदर्शन नहीं, दर्शन का आधार
मुख्य अतिथि और प्रख्यात कथावाचिका देवी हेमलता शास्त्री ने मातृशक्ति के गौरव को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि “हमारे यहाँ नारी प्रदर्शन की वस्तु नहीं, बल्कि श्रद्धा और दर्शन का केंद्र है।” उन्होंने संघ के ‘पंच परिवर्तन’—कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य, स्वदेशी और सामाजिक समरसता को घर-घर में लागू करने का आह्वान किया। भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस के बलिदानों का स्मरण कराते हुए उन्होंने नई पीढ़ी को राष्ट्र प्रथम की सीख दी।
100 साल की तपस्या का परिणाम: धर्मेंद्र
आरएसएस के प्रांत प्रचारक धर्मेंद्र जी ने वैचारिक दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि आज जो हिंदुत्व का उभार दिख रहा है, वह डॉ. हेडगेवार द्वारा 100 वर्ष पूर्व बोए गए बीज का परिणाम है। आज संघ एक विशाल वटवृक्ष की भांति समाज को छाया दे रहा है। उन्होंने आह्वान किया कि राष्ट्र निर्माण के लिए ‘शाखा’ को प्रत्येक घर का हिस्सा बनना चाहिए।
शक्ति प्रदर्शन:पीत वस्त्रों में हजारों मातृशक्ति ने निकाली कलश यात्रा
सम्मेलन से पूर्व नगर में दो अलग-अलग स्थानों (गोपालाश्रम और राधाकृष्ण मंदिर) से भव्य कलश यात्राएं निकाली गईं। लगभग 5 हजार महिलाओं ने पीत वस्त्र धारण कर सिर पर मंगल कलश के साथ नगर का भ्रमण किया। ढोल-नगाड़ों और जय श्रीराम के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। यात्रा का समापन रामलीला मैदान में हुआ, जहाँ जनसमूह एक विराट सभा में तब्दील हो गया।
गरिमामयी उपस्थिति
मंच पर समिति के अध्यक्ष शंकर लाल गुप्ता, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत लवानिया सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन कवि विष्णु उपाध्याय और प्रवीण अग्रवाल ने किया। अंत में सभी ने समरसता भोज (प्रसाद) ग्रहण किया।
