अखिलेश कुमार बोले- “अज्ञात की रगों में दौड़ता आपका रक्त ही सबसे बड़ा पुण्य है”
अर्जुन मिश्रा
फिरोजाबाद। कहते हैं इंसानियत की कोई भाषा नहीं होती, उसका बस एक ही रंग होता है— ‘लाल’। रविवार को कांच नगरी फिरोजाबाद में सेवा का एक ऐसा ही ‘कांच’ सा साफ और पारदर्शी मंजर दिखाई दिया। मौका था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक माधव सदाशिव गोलवलकर की जयंती का, जिसे जन समाज कल्याण न्यास ने किसी उत्सव की तरह नहीं, बल्कि ‘जीवन दान’ के महायज्ञ की तरह मनाया।
जब ‘चंद्र भवन’ बना मानवता का मंदिर
संघ कार्यालय ‘चंद्र भवन’ की चहारदीवारी रविवार को केवल एक कार्यालय नहीं रही, बल्कि वह एक ऐसा मंदिर बन गई जहाँ देवता नहीं, बल्कि ‘रक्तवीर’ अपनी रगों का उपहार चढ़ा रहे थे। कार्यक्रम का आगाज आरएसएस के विभाग प्रचारक अखिलेश कुमार और सेवा भारती के सुनील कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया, लेकिन असली चमक उन 55 युवाओं की आँखों में थी, जो अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।
“रक्तदान महादान: एक बूंद, एक जिंदगी”
मंच से जब विभाग प्रचारक अखिलेश कुमार का संबोधन शुरू हुआ, तो उन्होंने केवल शब्द नहीं कहे, बल्कि भावनाओं का संचार किया। उन्होंने कहा: इस अवसर पर अखिलेश कुमार ने कहा कि रक्तदान सबसे बड़ा दान है। यदि आपका दिया हुआ रक्त किसी जरूरतमंद के जीवन को बचा सके, तो इससे बड़ा पुण्य कोई नहीं। उन्होंने बताया कि रक्तदान करने से शरीर में नया रक्त बनने की प्रक्रिया और तेज होती है, इसलिए प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति को समय-समय पर रक्तदान करना चाहिए। साथ ही समाज में रक्तदान को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर कर लोगों को इसके लिए प्रेरित करना आवश्यक है।
उन्होंने आगे बताया कि रक्तदान केवल दूसरों को जीवन नहीं देता, बल्कि दानदाता के शरीर को भी नई ऊर्जा से भर देता है। यह कैंसर और हृदय रोगों के खिलाफ एक ‘सुरक्षा कवच’ है।
जज्बे के आगे छोटी पड़ी सुइयां
शिविर का दृश्य भावुक कर देने वाला था। 55 युवाओं ने जिस उत्साह से अपनी नसें सुइयों के हवाले कीं, वह इस बात का सबूत था कि फिरोजाबाद की मिट्टी में आज भी परोपकार जिंदा है। हर रक्तदाता के चेहरे पर एक ही सुकून था— “शायद मेरे इस प्रयास से किसी घर का चिराग बुझने से बच जाए।”
ये रहे सेवा के सारथी
इस पुनीत कार्य में महानगर प्रचारक शेखर कुमार, महानगर संघचालक प्रदीप, विभाग कार्यवाह बृजेश यादव, गौरव, अभिषेक, रामकुमार और सेवा प्रमुख सत्यम गुप्ता जैसे अनगिनत कार्यकर्ताओं ने कंधे से कंधा मिलाकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
यह शिविर केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि उन लोगों के मुंह पर तमाचा था जो कहते हैं कि आज का युवा केवल सोशल मीडिया तक सीमित है। जन समाज कल्याण न्यास ने साबित कर दिया कि जब समाज की भलाई की बात आएगी, तो फिरोजाबाद का युवा अपनी रगों का खून देने से भी पीछे नहीं हटेगा।
